राजयक्ष्मा या टीबी रोग (माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस)
टीवी एक ऐसी बीमारी है जो माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया के कारण फैलती है यह ज्यादातर फेफड़ों में होती है |इससे रोगी को खॉसी कफ और बुखार हो जाता है |यह एक छूत का रोग है ,अगर इसका प्रारंभ में ही इलाज नहीं किया जाए ,तो यह काफी जानलेवा बीमारी साबित होती है|
पुरातन आयुवेदिक ग्रन्थों में लिखा है कि-
मल-मूत्रादि वेगों को रोकने, अधिक व्रत, उपवास करने, अति मैथुन आदि धातुक्षयकारी कर्म करने, बलवान मनुष्य के साथ कुश्ती लड्ने अथवा शारीरिक शक्ति से अधिक, शारीरिक परिश्रम करने एवं बिना समय (असमय) खाने ,कभी कम व कभी अधिक खाने आदि कारणों से क्षय/यक्ष्मा रोग होता है। यह रोग त्रिदोषज सन्निपातिक है, क्योंकि यह तीनों दोषों से होता है।
मेहनतपरिश्रम करने, बोझा उठाने, लम्बी राह चलने, अजीर्ण बदहज्मी में भोजन करने, अति मैथुन करने, विषम स्थान पर सोने तथा अति शीतल पदार्थों के सेवन करने से कफ कुपित होता है। फिर वह अपने मित्र वायु व पित्त को भी कुपित कर देता है।
इस प्रकार वात, पित्त और कफ इन तोनों दोषों से क्षय रोग होता है। चूंकि यह रोग सम्पूर्ण क्रियाओं और धातुओं को क्षय करता है इसी से उसे क्षय कहते हैं।
यह देह और औषधियों को क्षय करता है। इसीलिए इसे क्षय कहते हैं अथवा इसका जन्म ही क्षय से हैं, इसलिए इसे क्षय कहते हैं। यह रस, रक्त, माँस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र इन सातों धातुओं को सोखता/सुखाता है। इसलिए इसका नाम शोष रखा गया है। क्षय, शोष, रोग, राज, राजयक्ष्मा ये चारों एक ही यक्ष्मा रोग के 8 नाम अथवा पर्यायवाची है।
टीवी के अन्य कारण:-
- अत्यधिक शराब का सेवन करने से
- अधिक मात्रा में धूम्रपान करने से
- साफ सफाई ना रखने से
- अत्यधिक दूषित वातावरण में सांस लेने से
टीबी के लक्षण:-
- भूख का ना लगाना
- वजन का कम होना
- अधिक कमजोरी होना
- बुखार आना
- सीने में दर्द होना
- तेज गति से सांस आना अधिक मात्रा में कब्ज आना और बलगम में खून भी आना तथा गर्दन की ग्रंथियों में सूजन या फोड़ा होना
- अधिक थकान महसूस होना
टीबी के घरेलू उपाय- टीवी के घरेलू उपचार इस प्रकार है -
लहसुन का प्रयोग करे :-
इसमें काफी मात्रा में सल्फयूरिक एसिड पाया जाता है जो टीबी के कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करता है। इसके लिए आधा चम्मच लहसुन, 1 कप दूध और four कप पानी को एक साथ उबालें। जब यह मिश्रण 1 चौथाई रह जाए तो इसे दिन में three बार पीने से टीबी रोग में फायदा होता है। इसके अलावा गर्म दूध में लहसुन मिलाकर भी पीया जा सकता है। इसके लिए दूध में लहसुन की कलियां उबालें और फिर इसका सेवन करें।
केले के प्रयोग से:-
इसके लिए 1 पके हुए केले को मसलकर नारियल पानी में मिलाएं और इसके बाद इसमें शहद और दही मिलाएं। इसे दिन में दो बार खाने से रोगी को फायदा होता है। इसके अलावा कच्चे केले का जूस बनाकर भी रोजाना पी सकते हैं।
आंवले के प्रयोग से:-
कच्चे आंवले को पीसकर इसका जूस बना लें और इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर रोजाना सुबह पीने से फायदा होता है।
संतरे के प्रयोग से:-
इसके लिए ताजा संतरे के जूस में नमक और शहद मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीएं। इसके अलावा संतरा खाने से भी टी बी के रोगी को फायदा होता है।
काली मिर्च का प्रयोग करके :-
फेफड़ों में जमा कफ और खांसी को दूर करने में काली मिर्च काफी फायदेमंद होती है। इसके लिए थोड़े से मक्खन में 8-10 काली मिर्च फ्राई करें और इसमें 1 चुटकी हींग मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को तीन बराबर भागों में बांटकर दिन में 7-8 बार लें।
अखरोट का प्रयोग करके:-
इसको पीस कर पाउडर बना लें और इसमें कुछ पीसी हुए लहसुन की कलियां मिलाएं। अब इसमें घर में बना हुआ ताजा मक्खन मिलाकर खाएं।
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